मुज़फ्फरपुर से पटना और गया की यादगार रोड ट्रिप – पटना जू से बोधगया तक का सफर



मुज़फ्फरपुर से पटना और गया की यादगार रोड ट्रिप – पटना जू से बोधगया तक का सफर (Part 1)


29 मार्च की सुबह हमारी एक छोटी-सी रोड ट्रिप ने ऐसा मोड़ लिया कि यह सफर हमेशा के लिए यादगार बन गया। शुरुआत में हमारा प्लान सिर्फ पटना घूमने का था। सोचा था कि पटना जू देखेंगे और समय मिला तो तारामंडल भी घूम लेंगे। लेकिन किसे पता था कि इसी ट्रिप में अचानक गया और बोधगया भी जुड़ जाएंगे।

इस यात्रा में हम कुल चार लोग थे—मैं, मेरी पत्नी और हमारे दो रिश्तेदार। सुबह करीब 7 बजे हम मुज़फ्फरपुर से अपनी कार लेकर पटना के लिए निकल पड़े। मौसम बेहद सुहावना था। रास्ते में हल्का-हल्का कोहरा था, इसलिए मैंने कार की स्पीड लगभग 70–80 किमी/घंटा ही रखी। सड़क के दोनों ओर फैले खेत, ठंडी हवा और सुबह का शांत वातावरण सफर को और भी खूबसूरत बना रहे थे।

पटना पहुंचकर रिश्तेदारों से मुलाकात

करीब कुछ घंटों की ड्राइव के बाद हम पटना पहुंचे और सबसे पहले अपने एक रिश्तेदार के घर गए। काफी समय बाद उनसे मुलाकात हुई, इसलिए कुछ देर बातें करने में ही समय निकल गया। वहीं स्वादिष्ट नाश्ता किया और फिर मैं और मेरी पत्नी पटना जू के लिए निकल पड़े।

तब तक धूप काफी तेज हो चुकी थी। पटना की सड़कों पर चलते हुए एक बात जरूर महसूस हुई कि यहां इतने ज्यादा फ्लाईओवर हैं कि अगर आप पहली बार आए हैं तो आसानी से गलत रास्ता पकड़ सकते हैं। एक गलत मोड़ और 5–7 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगना तय है।

ऐसे में Google Maps ने हमारी काफी मदद की। वह साफ बता रहा था कि कहां फ्लाईओवर के ऊपर जाना है और कहां नीचे से निकलना है। अगर मैप न होता तो शायद हम भी कई बार भटक जाते।

पटना जू की सैर

करीब 11 बजे हम पटना जू पहुंच गए। कार को पार्किंग में खड़ा किया। मुज़फ्फरपुर से निकलने से पहले ही मैंने कार की टंकी फुल करा ली थी, इसलिए पटना में ईंधन भरवाने की जरूरत ही नहीं पड़ी।

टिकट लेकर जैसे ही अंदर पहुंचे, बाहर की तेज गर्मी के मुकाबले अंदर का माहौल काफी सुकून देने वाला था। चारों तरफ घने पेड़ होने की वजह से गर्मी का असर काफी कम महसूस हो रहा था।

हमने आराम से पूरा जू पैदल घूमना शुरू किया। रास्ते में कई तरह के जानवर देखने को मिले—

  • शेर

  • बाघ

  • व्हाइट टाइगर

  • भालू

  • हिरण

  • दरियाई घोड़ा

  • तोते

  • बाज और कई अन्य पक्षी

जू में बैटरी से चलने वाली गाड़ियां भी थीं, जो टिकट लेकर पूरे जू का चक्कर लगवाती हैं। लेकिन मुझे हमेशा पैदल घूमना ज्यादा पसंद है। इससे हर जगह आराम से रुककर देखने का मौका मिलता है। जिस जानवर को जितनी देर देखना हो, उतनी देर देख सकते हैं। यही असली घूमने का मजा है।

Patna zoo


गर्मी से राहत

करीब पूरा जू घूमने के बाद हम काफी थक चुके थे। बाहर निकलकर पहले कुछ हल्के-फुल्के स्नैक्स खाए। गर्मी बहुत ज्यादा थी, इसलिए नींबू पानी पीया और बर्फ का गोला खाकर थोड़ी राहत मिली।

इसके बाद हम वापस पार्किंग पहुंचे। कार स्टार्ट की, एसी चलाया और लगभग एक घंटे तक कार में ही आराम किया। लंबी वॉक के बाद यह छोटा-सा ब्रेक काफी राहत देने वाला था।

पटना का City Centre Mall

आराम करने के बाद हमने सोचा कि अब थोड़ा शहर भी घूम लिया जाए। इसलिए हम City Centre Mall पहुंचे।

मॉल का वातावरण काफी शानदार था। यहां का सबसे आकर्षक हिस्सा वह खूबसूरत फाउंटेन था, जिसमें रंग-बिरंगी मछलियां तैर रही थीं। बहुत से लोग वहां फोटो और वीडियो बना रहे थे। हम भी काफी देर तक वहीं बैठकर उन खूबसूरत मछलियों को देखते रहे।

मुज़फ्फरपुर से पटना और गया की यादगार रोड ट्रिप – पटना जू से बोधगया तक का सफर


इसी दौरान अचानक हमारी पूरी यात्रा का प्लान बदल गया।

मेरी पत्नी ने कहा—

"जब मुज़फ्फरपुर से इतनी दूर आ ही गए हैं, तो क्यों न गया भी चलते हैं? रोज-रोज तो पटना आना नहीं होता। आज गया चलते हैं, रात वहीं रुकेंगे और कल बोधगया तथा अगर समय मिला तो राजगीर भी घूम लेंगे।"

मुझे भी यह सुझाव अच्छा लगा। बिना ज्यादा सोचे हमने फैसला किया कि अब इस रोड ट्रिप का अगला पड़ाव होगा गया

रिश्तेदारों के घर वापस जाकर बाकी दोनों लोगों को साथ लिया और शाम होते-होते हम गया की ओर निकल पड़े। रास्ते में एक बार फिर कार की टंकी फुल कराई, क्योंकि लंबी यात्रा में मैं कभी भी ईंधन की कमी का जोखिम नहीं लेना चाहता।

पटना से गया जाने वाला हाईवे बेहद शानदार है। चौड़ी और स्मूद सड़क पर कार चलाने का अलग ही आनंद आता है। इस सफर ने महसूस कराया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की सड़क कनेक्टिविटी वास्तव में काफी बेहतर हुई है।

रास्ते में एक टोल प्लाजा के पास रुककर हम सभी ने चाय पी और फिर गया की ओर अपनी यात्रा जारी रखी।

Part 2 में पढ़िए: गया पहुंचने के बाद विष्णुपद मंदिर के दर्शन, 100 फीट लंबी लेटी हुई बुद्ध प्रतिमा, महाबोधि मंदिर का अद्भुत अनुभव, ई-रिक्शा से मंदिर तक की यात्रा, और रात में Google Maps की वजह से रास्ता भटकने की मजेदार कहानी।


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